
देहरादून—- उत्तराखंड की राजनीति से आज एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद खंडूड़ी निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत में गहरा दुख व्याप्त है।
पिछले कई दिनों से उनके आवास पर नेताओं, शुभचिंतकों और परिजनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था। आज उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड ने एक ऐसे सादगीपूर्ण, अनुशासित और ईमानदार जननेता को खो दिया, जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में स्वच्छ छवि और दृढ़ नेतृत्व की मिसाल कायम की।
सेना से राजनीति तक_ अनुशासन और ईमानदारी की पहचान बने खंडूड़ी

Bhuvan Chandra Khanduri भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए थे। उन्हें देश के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee राजनीति में लेकर आए थे। वर्ष 1990 के दशक में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय राजनीतिक सफर शुरू किया और बहुत कम समय में अपनी साफ-सुथरी छवि, कार्यशैली और संगठन के प्रति समर्पण से शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया।
पहली बार लोकसभा पहुंचने के महज दो वर्षों के भीतर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया। यह उनके प्रति पार्टी नेतृत्व के भरोसे और राजनीतिक क्षमता का बड़ा प्रमाण माना गया।
उत्तराखंड की कमान संभालने वाले मजबूत प्रशासक
साल 2007 में जब उत्तराखंड में भाजपा आंतरिक गुटबाजी और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी, तब पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा भुवन चंद्र खंडूरी पर जताया। तमाम राजनीतिक समीकरणों और दबावों के बावजूद प्रदेश की कमान उनके हाथों में सौंपी गई।
उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए पारदर्शिता, अनुशासन और विकास को प्राथमिकता दी। सादगीपूर्ण जीवनशैली और कठोर प्रशासनिक फैसलों के कारण वे आम जनता के बीच अलग पहचान रखते थे।
प्रदेशभर में शोक, श्रद्धांजलियों का दौर शुरू
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की सूचना मिलते ही प्रदेशभर से शोक संदेश आने शुरू हो गए हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उत्तराखंड की राजनीति के एक ईमानदार और अनुशासित चेहरे के रूप में याद किया है।
उनका जाना केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनभावनाओं और स्वच्छ राजनीति की एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
