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नैनीताल—   उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में गड़बड़ी संबंधी याचिका में सवेरे 11 बजे जिलाधिकारी कार्यालय में 9 सदस्यों, जिलाधिकारी और एस.पी.क्राइम की मौजूदगी में समस्त वीडियो फुटेज का अवलोकन किया जाएगा।

जिला पंचायत के सदस्य निर्वाचित होने के बाद बीती 11 अगस्त को कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा। इसके बाद 14 अगस्त को 27 सदस्य अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को चुनने पहुंचे।

आरोप लगा कि उसमें से 22 ने तो वोट किया लेकिन 5 सदस्यों का अपहरण कर लिया गया।

न्यायालय ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए शहर में हुए अपराध को गंभीरता से ले लिया और इसपर सुनवाई शुरू की।

मंगलवार को निर्वाचन द्वारा चुनाव नतीजे घोषित करने के बाद आज पूनम बिष्ट और पुष्पा नेगी ने याचिका दायर कर कहा कि वोटों में छेड़छाड़ की गई है, जिसकी पुनः जांच की जाए।

आज, न्यायाधीश जे.नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले को सुना। सी.एस.सी.चंद्रशेखर सिंह रावत ने कहा कि याची केवल एक सदस्य है। उन्होंने न तो अध्यक्ष और न ही उपाध्यक्ष के पद के लिए आवेदन किया था। ए.जी. एस.एन.बाबुलकर ने कहा कि विपक्षी चाहते हैं कि इस न्यायालय से चुनाव के परिणाम की घोषणा हो और इस कोर्ट को एक मिनी ट्रायल कोर्ट बना दिया जाए।

शिकायतकर्ता की तरफ से सुनवाई के लिए वर्चुअली जुड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवीदत्त कामथ के अनुसार, हमने एक पत्र देकर न्यायालय के संज्ञान में कुछ शॉकिंग चीजें लानी चाही हैं। अपराध के बाद कहा गया था की इस चुनाव की री-काउंटिंग के लिए कहा जाएगा।

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हमारी शिकायत जिला निर्वाचन अधिकारी से है। आज दाखिल कागज में दिखाया जा रहा है कि बैलेट पेपर में छेड़छाड़ कर उसे एक से दो करा गया है। राज्य इलेक्शन कमीशन पर कैसे विश्वास होगा।

दीपा देवी और पुष्पा नेगी के बीच अध्यक्ष पद का चुनाव टाई(बराबर)रहा। इसमें, पुष्पा नेगी का एक वोट निरस्त हुआ और दीपा देवी जीत गई। वीडियो में दिखा की तलवारें लहराई गई और उनके 5 समर्थक सदस्यों को रगड़ कर ले जाया गया। अब इन्होंने न जाने कैसे कहा की कुछ नहीं हुआ और वो स्वेच्छा से गए थे ?

निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने कहा कि जिस केस का जिक्र हो रहा है उसमें और इसमें समानता नहीं है। वोटों के साथ छेड़छाड़ में इलेक्शन ट्राइब्यूनल स्थिति को साफ कर सकता है। इसमें कुछ मामले मतदान को पीछे करने आदि से सम्बंधित थे। इसमें इलेक्शन कमीशन ने जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य सचिव और डी.जी.पी.को पत्र लिखकर फ्री और फेयर इलेक्शन कराने को कहा था।

डी.एम.और डी.ई.ओ.वंदना सिंह ने वर्चुअली उपस्थित होकर कहा कि बैलेट बॉक्स को कैमरे की निगरानी में संभाल दिया गया है। अगर वोटर ने अपनी प्राथमिकता साफ से नहीं दी है, तो उसे इनवैलिड किया जा सकता है।

अध्यक्ष पद पर एक को 11 और दूसरे को 10 मत मीले थे। उपाध्यक्ष पद पर बराबर थे, इसलिए लाटरी से निर्णय लिया गया। हमने, चुनाव मतगणना की गवाही के लिए सभी को कई बार बुलाया था, लेकिन एक पक्ष से कोई नहीं आया। हम मतों को न्यायालय के सम्मुख भी रख सकते हैं। ए.आर.ओ.ने मत को इनवैलिड किया था।

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याचिकाकर्ता की तरफ से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र पाटनी ने न्यायालय से कहा कि हमारा कोई प्रत्याशी या प्रतिनिधि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की मतगणना के समय नहीं था। मेरे क्लाइंट का घर नथुवाखान में है, जबकी नोटिस हल्द्वानी में उनके भाई के घर के बाहर देर रात 2:30पर चस्पा किया गया और हमें 1:30बजे रात मतदान में उपस्थित होने को कहा। इसमें, मतपत्र में गड़बड़ी कर एक नंबर को दो नंबर किया गया। वीडियो फुटेज अवलोकन मामले में उनकी तरफ से समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत, व.अधि.देवेंद्र पाटनी और अधि.त्रिभुवन फर्त्याल शामिल होंगे।

मुख्य न्यायाधीश(सी.जे.)जे.नरेंद्र ने कहा कि हमने पहले से कहा था कि इस पूरी घटना को चुनौती, चुनाव आयोग में दी जाए। अगर आप वहां से असंतुष्ट होते हैं तो उच्च न्यायालय तो है ही। हम केवल अपराध रोकने पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे मामले सुनकर न्यायालय में जो केस हैं वो प्रभावित होते हैं।

आपकी नाराजगी आर.ओ.से है। हम अपनी ड्यूटी से मुंह नहीं मोड़ रहे हैं, लेकिन हम कह रहे हैं कि इसे संबंधित न्यायालय में ही बहस की जाए। जिन पांच लोगों का अपहरण का आरोप लगाया गया था, वो न्यायालय आए थे लेकिन उन्होंने एक बार भी विरोध की फुसफुसाहट तक नहीं की। एक शिकायत ये है कि मतदान पत्र में छेड़छाड़ कर ओवर राइटिंग से उसे बदला गया है। बैलेट में पहली प्राथमिकता एक(1)लिखकर अपने प्रत्याशी को दी जाती है।

पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मतगणना में मौजूद अधिकारी ने छेड़छाड़ की है। हम बैलेट के साथ छेड़छाड़ के मामले में सुनवाई करेंगे।

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इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग है, जिसे देखने के लिए एक समिति बनाई जाए। उसमें, दोनों तरफ से तीन तीन अधिवक्ता, इलेक्शन कमीशन, दोनों प्रत्याशी, जिलाधिकारी और एस.पी.जाकर जिलाधिकारी कार्यालय में सी.सी.टी.वी.फुटेज देखेंगे।


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