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हल्द्वानी—   बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई से पहले नैनीताल पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई है। संवेदनशीलता को देखते हुए बनभूलपुरा क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने फ्लैग मार्च के साथ एरिया डोमिनेशन, चेकिंग, सत्यापन और ड्रोन निगरानी तेज कर दी है।

ड्रोन से आसमान, पुलिस से जमीन की निगरानी
SSP नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी के निर्देश पर पुलिस ने बनभूलपुरा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। अधिकारियों और जवानों को विशेष ब्रीफिंग दी गई है। क्षेत्र में दो ड्रोन टीमों के साथ छतों, गलियों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की जा रही है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने, भड़काऊ या भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इन इलाकों में हुआ फ्लैग मार्च
पुलिस और सुरक्षा बलों ने रेलवे स्टेशन, लाइन नंबर 17, इंद्रानगर, मुजाहिद चौक, गोपाल मंदिर, ठोकर, शनि बाजार रोड, ताज मस्जिद, 16 नंबर तिराहा, गांधी नगर, लाइन नंबर 8, चोरगलिया रोड और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया।

फ्लैग मार्च का उद्देश्य कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस की तैयारियों और मौजूदगी का भरोसा दिलाना बताया गया है।

भारी सुरक्षा बल तैनात
क्षेत्र में सुपर जोन, जोन, SP, CO, इंस्पेक्टर, SI समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा PAC की दो कंपनियां, एंटी-रायट टीमें, BDS, फायर यूनिट, बम निरोधक दस्ता, हॉक पुलिस और ड्रोन टीमें भी तैयार रखी गई हैं।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि उपद्रव की नीयत से छतों पर पत्थर, ईंट, रोड़ी, मलबा या हथियार जैसी वस्तुएं जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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दो दशक से अदालतों में चल रहा मामला
बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद 2007 से अदालतों में विचाराधीन है। वर्ष 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट ने रेलवे को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। दिसंबर 2022 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण/बेदखली पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों को हटाने से पहले पुनर्वास के पहलू पर विचार करने की जरूरत बताई थी। अब सभी की निगाहें 9 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।

SSP नैनीताल ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अदालत के निर्णय का सम्मान करें, अफवाहों पर भरोसा न करें और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री साझा करने से बचें।


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