Category: देहरादून

  • उत्तराखंड में तेज़ बारिश का अलर्ट,,,  अगले 5 दिन संभलकर रहें..।

    उत्तराखंड में तेज़ बारिश का अलर्ट,,, अगले 5 दिन संभलकर रहें..।

    देहरादून—  उत्तराखंड में मानसून फिलहाल थमने के मूड में नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश की सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। **राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक प्रदेश में 85 सड़कें अभी भी बंद हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि चारधाम यात्रा फिलहाल सुचारु रूप से जारी है।

    7 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और चंपावत समेत कई जिलों में अलग-अलग दिनों में भारी बारिश, तेज गर्जना और बिजली गिरने की आशंका है।

    पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

    वहीं लगातार बारिश के कारण प्रदेशभर में 85 सड़कें बाधित हैं। इनमें शामिल हैं_ 1 राष्ट्रीय राजमार्ग,, 6 लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कें ,, 78 पीएमजीएसवाई और अन्य ग्रामीण मार्ग।

    संबंधित विभाग युद्धस्तर पर मशीनों की मदद से रास्ते खोलने का काम कर रहे हैं।

    बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 45.75 लाख से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं।

    प्रशासन मौसम की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    प्रशासन की अपील

    मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

    यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की ताजा जानकारी जरूर लें। साथ ही प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    सभी जिला प्रशासनों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

  • उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के स्थान पर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन, आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा।

    उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के स्थान पर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन, आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा।

    उत्तराखंड—  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अल्पसंख्यक मोर्चा महानगर, देहरादून द्वारा आयोजित ‘लाभार्थी सम्मेलन’ में प्रतिभाग करते हुए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लाभार्थियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों, आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वरोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

    मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है तथा यही विश्वास जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में विकास की ऐसी कार्यसंस्कृति स्थापित हुई है जिसमें योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंच रहा है। डबल इंजन सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों तक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय लेते हुए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है।

    इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

    उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानती है और प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समान नागरिक संहिता सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को मजबूत करती है तथा राज्य के सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने का कार्य करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय वृद्धि, गरीब परिवारों के उत्थान, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आवास, पेयजल, सड़क, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में प्रभावी कार्य किए हैं।

    उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने लाभार्थियों से आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं की जानकारी समाज के अन्य पात्र लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता के सुझावों और अनुभवों के आधार पर योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर रही है।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक विनोद चमोली, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं दायित्वधारी दिनेश अग्रवाल, देहरादून नगर निगम के महापौर सौरभ थपलियाल, अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधि, पार्टी के सम्मानित कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड सरकार की वेबसाइटों पर हुआ बड़ा साइबर अटैक,,, बैकअप सिस्टम ने बचाया..।

    उत्तराखंड सरकार की वेबसाइटों पर हुआ बड़ा साइबर अटैक,,, बैकअप सिस्टम ने बचाया..।

    देहरादून—   उत्तराखंड सरकार की डिजिटल व्यवस्था पर शनिवार को बड़ा साइबर हमला हुआ। रैनसमवेयर अटैक के कारण सीएम हेल्पलाइन, सीएम रिलीफ फंड समेत 20 से अधिक सरकारी वेबसाइटें और ऑनलाइन पोर्टल प्रभावित हो गए।

    इसके चलते करीब 15 घंटे तक सरकारी ऑनलाइन सेवाएं बाधित रहीं और हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    हमले का असर प्रमाणपत्र, ऑनलाइन आवेदन, शिकायत निवारण और अन्य सरकारी सेवाओं पर भी पड़ा। कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी पोर्टल अपडेट नहीं कर सके, जिससे सरकारी कामकाज की रफ्तार भी धीमी पड़ गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हमला सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) के स्टेट डेटा सेंटर पर हुआ। सुरक्षा के मद्देनज़र प्रभावित सर्वरों को तुरंत मुख्य नेटवर्क से अलग कर दिया गया, ताकि हमला आगे न फैल सके। इसी वजह से कई सरकारी वेबसाइटें और पोर्टल देर रात तक सामान्य रूप से काम नहीं कर पाए।

    हालांकि, आईटीडीए की तकनीकी टीम ने बैकअप सिस्टम की मदद से अधिकांश सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल कर दिया है। फिलहाल साइबर विशेषज्ञ पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और हमले की प्रकृति तथा स्रोत का पता लगाया जा रहा है।

    2024 के अनुभव से मिली राहत

    यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड सरकार साइबर हमले का शिकार हुई हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में हुए बड़े साइबर हमले में सीएम हेल्पलाइन समेत लगभग 90 सरकारी वेबसाइटें कई दिनों तक पूरी तरह ठप हो गई थीं।

    उस घटना के बाद राज्य के डेटा सेंटर में बैकअप और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस बार उसी मजबूत बैकअप सिस्टम की बदौलत अधिकांश सेवाओं को कुछ ही घंटों में दोबारा शुरू कर दिया गया, जिससे संभावित बड़ा नुकसान टल गया।

    क्या होता है रैनसमवेयर?

    रैनसमवेयर एक खतरनाक साइबर मालवेयर होता है, जो किसी सिस्टम या सर्वर में घुसकर उसके डेटा को एन्क्रिप्ट (लॉक) कर देता है। इसके बाद साइबर अपराधी डेटा को दोबारा खोलने के बदले फिरौती (Ransom) की मांग करते हैं। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे गंभीर साइबर खतरों में से एक माना जाता है।

  • सीएम धामी ने दी ₹676 करोड़ की विकास योजनाओं को मंजूरी,,, कुमाऊं मंडल को मिली बड़ी सौगात..।

    सीएम धामी ने दी ₹676 करोड़ की विकास योजनाओं को मंजूरी,,, कुमाऊं मंडल को मिली बड़ी सौगात..।

    देहरादून–   उत्तराखंड में विकास कार्यों को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनहित योजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए ₹676 करोड़ की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

    इस राशि से प्रदेश में पेयजल, बिजली, सोलर लाइट, उच्च शिक्षा, जिला पंचायतों, नगर निकायों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम योजनाओं को मंजूरी दी है। अल्मोड़ा नगर निगम क्षेत्र में 200 सोलर लाइटें लगाने के लिए ₹35 लाख, जबकि चमियाला नगर पंचायत में सेंट्रल कंट्रोल मॉनिटरिंग सिस्टम और एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ₹3.07 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

    राजधानी देहरादून और पिथौरागढ़ में भी आधुनिक एलईडी स्ट्रीट लाइट और सीसीएमएस सिस्टम लगाने के लिए करोड़ों रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे शहरों की रोशनी व्यवस्था और अधिक बेहतर होगी।

    नैनीताल जिले की कृष्णापुर पेयजल योजना के लिए ₹2.13 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, जिससे क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री ने कुमाऊं मंडल में 33/11 केवी सब-स्टेशन, विद्युत लाइन और फीडर निर्माण, यूजेवीएनएल की परियोजनाओं तथा केदारनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत बिजली से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी बड़ी धनराशि मंजूर की है।

    इनमें अकेले केदारनाथ मास्टर प्लान की विद्युत परियोजनाओं के लिए ₹212.10 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि में विज्ञान संकाय के पीजी भवन निर्माण के लिए ₹19 करोड़ मंजूर किए गए हैं।

    इसके अलावा प्रदेश की सभी जिला पंचायतों को दूसरी तिमाही की किस्त के रूप में ₹82.21 करोड़, जबकि सभी शहरी स्थानीय निकायों को ₹325.03 करोड़ जारी करने की भी मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि इन स्वीकृतियों से प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, स्थानीय निकायों को मजबूती मिलेगी और आम लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

  • गुलदार के आतंक से परेशान ग्रामीणों का वन विभाग पर फूटा गुस्सा,,।

    गुलदार के आतंक से परेशान ग्रामीणों का वन विभाग पर फूटा गुस्सा,,।

    कोटद्वार–   पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार की दहशत थमने का नाम नहीं ले रही। गुरुवार को यमकेश्वर विकासखंड के देवराना गांव मेंं गुलदार की बढ़ती गतिविधियों से परेशान ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि गुलदार के डर से उनका घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

    कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद डबराल के नेतृत्व में लोगों ने वन विभाग कार्यालय में प्रदर्शन किया।

    आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। विनोद डबराल ने बताया कि गुलदार अब तक गांव के दर्जनों मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है।

    इसके अलावा ग्रामीण राजेंद्र सिंह, उर्मिला देवी और प्रमिला देवी पर भी हमला कर चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही घटनाओं के बावजूद विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में गश्त बढ़ाने, गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

    प्रदर्शन में ग्राम प्रधान दीपक, प्रीति देवी, निशा जोशी, बबीता बिष्ट, भगत सिंह, कमलेश ग्वाड़ी, अमित देवरानी, करूणा रावत, नीलम देवी, पिंकी देवी, मनोज ग्वाड़ी, सुनील उनियाल, सुमंती देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

  • भारत–नेपाल मैत्री बैठक एवं लखपति दीदी सम्मेलन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को मिली नई ऊंचाई,,,।

    भारत–नेपाल मैत्री बैठक एवं लखपति दीदी सम्मेलन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को मिली नई ऊंचाई,,,।

    देहरादून/डीडीहाट—  भारत एवं नेपाल के मध्य सदियों पुराने “रोटी-बेटी के संबंधों” को और अधिक सशक्त बनाने तथा सीमांत क्षेत्रों की महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को नई दिशा देने के उद्देश्य से नेपाल के दार्चुला में भारत–नेपाल मैत्री बैठक एवं लखपति दीदी सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

    इस अवसर पर दोनों देशों की महिला जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए महिला नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और सीमा पार सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।

    कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, उत्तराखण्ड की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट के नेतृत्व में उत्तराखण्ड के प्रतिनिधिमंडल ने सहभागिता की।

    सम्मेलन में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। भारत और नेपाल की महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों एवं सफल प्रयासों को साझा करते हुए भविष्य में महिला उद्यमिता, प्रशिक्षण एवं आजीविका के क्षेत्र में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “लखपति दीदी” अभियान रहा। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री

    नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वरोजगार, सूक्ष्म उद्यम, कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, डेयरी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई तथा डिजिटल सेवाओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रतिवर्ष एक लाख रुपये अथवा उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।

    यह अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज में नेतृत्व की नई पहचान भी प्रदान कर रहा है।

    सम्मेलन में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण, प्रशिक्षण, विपणन सहायता, डिजिटल भुगतान, उत्पाद ब्रांडिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान की जा रही है।

    आज देशभर में करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।

    भारत और नेपाल की महिला प्रतिनिधियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक समानताएं दोनों देशों की मित्रता की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ऐसे आयोजनों से महिलाओं के बीच संवाद, कौशल आदान-प्रदान, आर्थिक साझेदारी तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी।

    सीमांत क्षेत्रों में महिला उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

    इस अवसर पर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र नेगी ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच केवल भौगोलिक सीमाएं ही नहीं, बल्कि सदियों पुराने पारिवारिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध भी हैं। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता इन संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी तथा सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

    उत्तराखण्ड से सम्मेलन में कमला चुफाल, लक्ष्मी मेहता, शकुंतला अगारी, सीमा रोकली, राधा बिष्ट, राधा मर्तोलिया, तुलसी, लक्ष्मी परमार, इंद्रा देवी, मनीष नवीन सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    नेपाल की महिला प्रतिनिधियों ने सभी भारतीय अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए दोनों देशों की मित्रता को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संकल्प व्यक्त किया।

    अपने पिथौरागढ़ जिला प्रवास के दौरान प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने सीमांत क्षेत्र के रंग संग्रहालय में रंग समुदाय की मातृशक्ति से आत्मीय संवाद किया।

    इस दौरान उन्होंने समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचय प्राप्त करते हुए उनकी पारंपरिक वेशभूषा ‘चुंग बाला’, ‘रकलच जोजगा’ एवं ‘राकलची’ धारण की तथा ‘बांगच’, ‘चन्द्रहार’, ‘बहा’ और ‘बिराबली बालडंग’ जैसे पारंपरिक आभूषण भी पहने।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, परंपराएं और जनजातीय विरासत हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का दायित्व है। मातृशक्ति हमारी संस्कृति की सबसे सशक्त संवाहक है और उसका सम्मान ही हमारी पहचान एवं गौरव का आधार है।

    इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री श्रीमती रश्मि रस्तोगी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती कमला चुफाल, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी मेहता तथा प्रदेश कार्यालय सह-प्रभारी श्रीमती बबली चौहान सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के अंत में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में भी भारत और नेपाल की महिलाओं के बीच संवाद, प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों के अनुभवों का आदान-प्रदान तथा महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों की मातृशक्ति आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।

  • उत्तराखंड में आज भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा,,, ,इन जिलों में स्कूल बंद..।

    उत्तराखंड में आज भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा,,, ,इन जिलों में स्कूल बंद..।

    देहरादून—  उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पूरे शबाब पर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 जुलाई से 3 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज गर्जना, आकाशीय बिजली और अत्यंत तीव्र वर्षा की चेतावनी जारी की है।

    लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की जा रही है।

    29 जुलाई को इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी

    मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट के मद्देनज़र टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर जिला प्रशासन ने 29 जुलाई (बुधवार) को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी विद्यालयों एवं सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिवसीय अवकाश घोषित कर दिया है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन अनिवार्य होगा। यदि किसी विद्यालय द्वारा आदेश की अवहेलना की जाती है और किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित प्रधानाचार्य या प्रबंधक के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    29 जुलाई: सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और टिहरी में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल में गर्जन, आकाशीय बिजली और अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर पड़ने की संभावना है।

    30 जुलाई: बारिश का सिलसिला रहेगा जारी

    30 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश, बिजली चमकने और गर्जन की गतिविधियां बनी रहेंगी। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

    31 जुलाई और 1 अगस्त: इन जिलों पर रहेगी नजर

    31 जुलाई को देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर और नैनीताल में भारी बारिश की चेतावनी है। जबकि 1 अगस्त को पिथौरागढ़ और चम्पावत में भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि पर्वतीय जिलों में लगातार तेज बारिश का दौर बना रह सकता है।

    2 और 3 अगस्त को भी राहत के आसार नहीं

    मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 2 और 3 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश के चलते भूस्खलन, चट्टान गिरने, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, जलभराव और सड़कें बाधित होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

    आपके जिले में स्कूल खुलेंगे या बंद रहेंगे?

    जैसे ही किसी अन्य जिले में अवकाश या मौसम को लेकर नया आदेश जारी होगा, इस खबर को तुरंत अपडेट किया जाएगा। बने रहिए हमारे साथ, सबसे तेज और सबसे सटीक अपडेट के लिए।

  • उत्तराखंड में झमाझम बारिश का दौर रहेगा जारी,,, 3 अगस्त तक नहीं मिलेगी राहत।

    उत्तराखंड में झमाझम बारिश का दौर रहेगा जारी,,, 3 अगस्त तक नहीं मिलेगी राहत।

    देहरादून—   उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने 3 अगस्त तक राज्यभर में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जारी करते हुए कई जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश, अत्यंत तीव्र वर्षा, आकाशीय बिजली और गर्जन की चेतावनी जारी की है।

    विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

    29 जुलाई: सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और टिहरी जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल में गर्जन, आकाशीय बिजली और अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर पड़ सकते हैं। राज्य के अन्य जिलों में भी भारी बारिश और तेज गर्जना के साथ बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।

    30 जुलाई: कई जिलों में भारी बारिश जारी रहेगी

    30 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल जिलों में भारी वर्षा की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज गर्जना, बिजली चमकने और तीव्र से अति तीव्र वर्षा के दौर जारी रह सकते हैं। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी।

    31 जुलाई: नैनीताल समेत चार जिलों पर विशेष नजर

    31 जुलाई को पौड़ी, देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पर्वतीय इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली चमकने की संभावना है, जबकि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी गर्जन और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।

    1 अगस्त: सीमावर्ती जिलों में भी भारी बारिश

    1 अगस्त को पिथौरागढ़ और चम्पावत जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना है। पर्वतीय जिलों में गर्जन, आकाशीय बिजली और तीव्र वर्षा का दौर जारी रह सकता है, जबकि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी बिजली चमकने की संभावना बनी रहेगी।

    दो और तीन अगस्त को भी मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश भर के कई हिस्सों में बारिश के आसार जताए गए हैं।

    प्रशासन और लोगों के लिए जरूरी सलाह

    मौसम विभाग ने चेताया है कि लगातार बारिश के चलते भूस्खलन, चट्टान गिरने, नदी-नालों के उफान, जलभराव और सड़क बाधित होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने और मौसम विभाग व जिला प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।

  • देहरादून – बारिश में धंसा नन्दा की चौकी का नया पुल..।

    देहरादून – बारिश में धंसा नन्दा की चौकी का नया पुल..।

    देहरादून–   राजधानी देहरादून को विकासनगर और हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाला नंदा की चौकी का नवनिर्मित पुल तेज बारिश में क्षतिग्रस्त होकर बह गया।

    सौंग नदी में आए तेज बहाव के कारण पुल धंसने से देहरादून-विकासनगर मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    स्थानीय लोगों ने सरकार और निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसी के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग की जा रही है।

  • वीरों के सम्मान में धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला,,,।

    वीरों के सम्मान में धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला,,,।

    देहरादून—   कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के वीर सैनिकों के सम्मान में बड़ा ऐलान किया है।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी जाएगी। इस फैसले को सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान और शौर्य के प्रति राज्य सरकार का सम्मान बताया गया।

    देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया और उनके त्याग को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया।

    मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 1999 के कारगिल युद्ध में देश के 527 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है, जहां की सैन्य परंपरा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई अहम कदम भी गिनाए। उन्होंने बताया कि शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि पहले ही ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की जा चुकी है। साथ ही वीरता पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक सहायता में भी बढ़ोतरी की गई है।

    उन्होंने कहा कि बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आवेदन की समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा, सैनिकों और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टांप शुल्क में छूट जैसी कई सुविधाएं दी जा रही हैं।

    इसके अलावा पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बनाने और उनके भूमि विवादों के मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में बन रहा सैन्य धाम अब अंतिम चरण में है। राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से तैयार हो रहा यह धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति और बलिदान का प्रतीक बनेगा।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि उत्तराखंड देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ स्थापित कर रहा है। इसके माध्यम से सेवामुक्त अग्निवीरों को उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता, कौशल विकास, स्वरोजगार और सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इस मौके पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित कर चुकी है।

    कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व सैनिक, सैन्य अधिकारी और शहीदों के परिजन भी मौजूद रहे।