नैनीताल— मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर रविवार को जी.बी. पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान, नैनीताल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश सिंह रजवार ने की।
बैठक में रजवार ने वन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच, विशेषकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:
1. संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ेगी:
वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां सोलर लाइट लगाने, फेंसिंग करने और स्कूली रास्तों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
2. बंदरों की समस्या का समाधान:
नैनीताल में बंदरों की बढ़ती समस्या के लिए वानर बंध्याकरण कार्यक्रम को एक बड़े अभियान के रूप में चलाने पर जोर दिया गया।
3. जन-जागरूकता अभियान:
ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी, बरती जाने वाली सावधानियों और आपात स्थिति में वन विभाग को सूचना देने के बारे में जागरूक किया जाएगा।
4. CSR से मदद:
जमरानी परियोजना के सीएसआर फंड से ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइट, फेंसिंग और रेस्क्यू वाहन की व्यवस्था कराने की पहल की जाएगी।
5. रेस्क्यू टीम होगी हाईटेक:
आगामी सीजन को देखते हुए रेस्क्यू टीमों में अतिरिक्त कार्मिकों की तैनाती, 24×7 उपलब्धता और नाइट विजन कैमरे, जीपीएस, ट्रैंक्विलाइजिंग गन और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस करने के निर्देश दिए गए।
इस दौरान आयोग सदस्य ने नैनीताल वन प्रभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।

बैठक में उप वन संरक्षक आकाश गंगवार, उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चंद, शशि देव, वन क्षेत्राधिकारी नितिन पंत, विजय मेलकानी समेत वन विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
