हल्द्वानी—   पशुपालकों को दूध का सम्मानजनक मूल्य दिलाने की मांग को लेकर किसान मंच उत्तराखंड ने आंदोलन का ऐलान किया है। सोमवार को मोती महल, नैनीताल रोड में हुई प्रेस वार्ता में संगठन ने कहा कि 1 अक्टूबर को निदेशक, डेयरी विकास विभाग को ज्ञापन देकर सरकार को 2 सप्ताह का समय दिया गया है। यदि ठोस निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री की विधानसभा चंपावत से शांतिपूर्ण पशुपालक आंदोलन शुरू होगा।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय, प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई, उपाध्यक्ष कमल तिवारी, संरक्षक पीयूष जोशी और ब्लॉक अध्यक्ष ललित मोहन जोशी मौजूद रहे।

हिमाचल में गाय का दूध ₹61, भैंस का ₹71, तो उत्तराखंड में क्यों नहीं?” – किसान मंच ने सरकार को दिया 2 हफ्ते का अल्टीमेटम, नही तो चंपावत से आंदोलन,,।

प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने कहा – पशुपालन पहाड़ में आजीविका और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ा है। चारा, पशु आहार, दवा सब महंगा हुआ है, पर दूध का दाम नहीं बढ़ा। हिमाचल 2026-27 बजट में गाय के दूध का दाम ₹51 से ₹61 और भैंस का ₹61 से ₹71 कर सकता है तो उत्तराखंड क्यों नहीं? पशुपालक खैरात नहीं, मेहनत का दाम मांग रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा – “हमने पहले कागज से दरवाजा खटखटाया है, भीड़ से नहीं। सरकार चाहे तो मेज पर समाधान करे, नहीं तो चंपावत की धरती पर सड़क पर संवाद होगा। पहाड़ बचाना है तो पशुपालक की जेब में उसकी मेहनत का दाम पहुंचाना होगा।” दो हफ्ते बाद चंपावत में जनसंवाद कर आंदोलन की तारीख घोषित होगी।

कमल तिवारी बोले – लागत के अनुपात में आय नहीं तो युवा पशुपालन क्यों करेगा? ये अगली पीढ़ी का सवाल है।

ललित मोहन जोशी ने कहा – ये केवल चंपावत की लड़ाई नहीं, हल्द्वानी-नैनीताल का पशुपालक भी साथ खड़ा होगा।

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संरक्षक पीयूष जोशी ने कहा – “हमारी पहली प्राथमिकता संवाद है, अंतिम प्रतिबद्धता पशुपालक के हक के साथ है। आंदोलन शुरू हुआ तो समाधान तक चलेगा। हम हर किसान, सामाजिक और जनसंगठन का दरवाजा खटखटाएंगे।” आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा।

किसान मंच ने जनता से अपील की – दूध के पीछे किसान परिवार की मेहनत है, इसे मजबूत करना गांव बचाना है।

( दूध हमारा-मेहनत हमारी, तो कीमत भी सम्मानजनक चाहिए! पहाड़ बचाना है-पशुपालक बचाओ!)

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