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हल्द्वानी गौलापार इंटरनेशनल स्टेडियम अब उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय का मुख्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने पहले ही इसे मंजूरी दे दी है और यह परिसर खेल विश्वविद्यालय के अधीन सौंपने की प्रक्रिया में है, जिससे इसका उपयोग क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, एथलेटिक्स जैसी बड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए किया जा सकेगा 35 हेक्टेयर में फैले इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मोडर्न सुविधाएँ जैसे स्विमिंग‑डाइविंग पूल के अलावा हाल ही में एस्ट्रो‑टर्फ हॉकी स्टेडियम का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है ।

हालांकि, परियोजना को वनभूमि से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि प्रस्तावित अतिरिक्त 25 हेक्टर वनभूमि पर केंद्र ने रोक लगा दी है—लेकिन राज्य सरकार ने इसे राजस्वभूमि से बदलने की कोशिश शुरू कर दी है और प्रशासनिक कार्य भी अधिसूचित हो चुका है । इसी बीच, नेशनल गेम्स 2025 के दौरान यहाँ किए गए तैयारियों में क्रिकेट पिच की अस्थायी हटाई और फुटबॉल पिच का उपयोग, साथ ही चयनात्मक प्रशिक्षण अभियान, यह स्पष्ट संकेत हैं कि स्टेडियम अब बहु-खेल आयोजन के लिए सक्रिय रूप से स्थित हो रहा है ।

सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से यह पहल हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों को एक खेल‑आधारित हब के रूप में प्रतिष्ठित करेगी, जिससे स्थानीय व्यापार, आतिथ्य क्षेत्र, रोजगार व खेल प्रतिभाओं को भी मजबूती मिल सकती है। राजनैतिक दृष्टिकोण से यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग का प्रतीक है और मुख्यमंत्री धामी की खेल को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। वनभूमि विवाद सुलझने के बाद यह परिसर न सिर्फ खेल विश्वविद्यालय का गढ़ बनेगा, बल्कि उत्तराखंड का प्रमुख खेल-प्रशिक्षण और आयोजन स्थल भी बन सकेगा।

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