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  • देहरादून के नामी अस्पताल में हादसा—  AC ब्लास्ट ने ली महिला की जान,,, 3 पुलिसकर्मी भी झुलसे..

    देहरादून के नामी अस्पताल में हादसा— AC ब्लास्ट ने ली महिला की जान,,, 3 पुलिसकर्मी भी झुलसे..

    उत्तराखंड—  देहरादून के नामी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बुधवार सुबह हुआ दर्दनाक हादसा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर गया। राजधानी देहरादून स्थित पैनेसिया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के ICU में लगे AC में हुए ब्लास्ट के बाद मची अफरा-तफरी में एक महिला की मौत हो गई,

    जबकि तीन पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए।

    हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मोटी रकम वसूलने वाले निजी अस्पतालों की इमरजेंसी सुरक्षा व्यवस्था आखिर कितनी मजबूत है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह ICU में लगे एयर कंडीशनर में पहले शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते तेज धमाके जैसी आवाज के साथ पूरे वार्ड में धुआं फैल गया।

    अचानक हुए इस हादसे से अस्पताल में हड़कंप मच गया। ICU में भर्ती मरीजों को तत्काल बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, जिन्हें डॉक्टरों, अस्पताल स्टाफ, पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने स्ट्रेचर, गोद और बेडशीट के सहारे बाहर पहुंचाया।

    घटना में 60 वर्षीय वीरवती की मौत हो गई, जबकि तीन पुलिसकर्मियों सहित 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में तीन दिन की नवजात बच्ची और ढाई साल की मासूम गौरी भी शामिल है। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी कैलाश हॉस्पिटल और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि ICU में आग नहीं लगी थी और केवल धुआं फैला था, लेकिन घटना के बाद सामने आए वीडियो कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। वीडियो में मरीजों और कर्मचारियों को धुएं के बीच बदहवास हालत में बाहर निकलते देखा जा सकता है। कुछ मरीजों को अस्पताल परिसर में ही CPR दिया गया, जबकि परिजनों की चीख-पुकार ने पूरे माहौल को भयावह बना दिया।

    हादसे के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे और आईजी गढ़वाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को फिलहाल सीज कर दिया गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शॉर्ट सर्किट और AC ब्लास्ट आखिर किन परिस्थितियों में हुआ और अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम कितना प्रभावी था।

    कैलाश हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. पवन शर्मा के अनुसार सूचना मिलते ही तत्काल एंबुलेंस भेजी गईं और ड्यूटी से लौट चुके डॉक्टरों को भी वापस बुलाया गया ताकि घायलों का इलाज बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके। उन्होंने बताया कि मृत महिला को अस्पताल लाए जाने तक उसकी मौत हो चुकी थी, जबकि अन्य मरीजों का इलाज जारी है।

    वहीं चीफ फायर ऑफिसर अभिनव त्यागी का कहना है कि फायर टीम 5 से 7 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई थी और आग ICU तक सीमित रही। उनके मुताबिक अस्पताल में स्मोक सेंसर, फायर एक्सटिंग्विशर, होज रील और तीन एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद थीं। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह दुरुस्त थे, तो फिर ICU जैसे संवेदनशील वार्ड में ऐसा हादसा कैसे हुआ।

    मरीजों से भारी-भरकम फीस लेने वाले इन अस्पतालों में क्या आपातकालीन हालात से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी है, यह अब प्रशासनिक जांच का सबसे बड़ा विषय है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • नम आंखों से पूर्व मुख्यमंत्री एवम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को दी अंतिम विदाई,,,,,

    नम आंखों से पूर्व मुख्यमंत्री एवम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को दी अंतिम विदाई,,,,,

    उत्तराखंड—-  उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी की अंतिम यात्रा मंगलवार को देहरादून से हरिद्वार के लिए रवाना हुई। पूरे राजकीय सम्मान और भावुक माहौल के बीच हजारों लोगों ने अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।

    देहरादून स्थित आवास से निकली अंतिम यात्रा में “मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी अमर रहें” के नारे गूंजते रहे। भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों ने रास्ते भर पुष्पवर्षा कर अपने जननायक को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    अंतिम संस्कार में देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन भी शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल गुरमीत सिंह और अन्य नेताओं के साथ पुष्पचक्र अर्पित कर खंडूरी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

    पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे मनीष खंडूरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। करीब सात किलोमीटर लंबी शव यात्रा उनके आवास से भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक निकाली गई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम दर्शन किए।

    भाजपा प्रदेश मुख्यालय में नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अंतिम यात्रा हरिद्वार के खड़खड़ी घाट के लिए रवाना हुई, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    91 वर्षीय मेजर जनरल खंडूरी का मंगलवार सुबह 11:10 बजे निधन हो गया था। वह पिछले लगभग 50 दिनों से देहरादून के मैक्स सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती थे और लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे।

    उनके निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। राज्य सरकार ने 19 से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

  • उत्तराखंड— 20 मई को सभी स्कूल, कॉलेज और कार्यालय  रहेंगे बंद ।

    उत्तराखंड— 20 मई को सभी स्कूल, कॉलेज और कार्यालय रहेंगे बंद ।

    देहरादून—-  उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के आकस्मिक निधन पर राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

    शासन के निर्देशों के अनुपालन में शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों और विभागीय कार्यालयों को 20 मई 2026 को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 19 मई से 21 मई 2026 तक प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा इस अवधि में कोई भी शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

    पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में 20 मई को उनकी अंत्येष्टि के दिन राज्य सरकार के समस्त कार्यालय बंद रहेंगे।

    इसी क्रम में राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज एवं शिक्षा विभाग के कार्यालय भी बंद रखे जाएंगे। शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को शासन के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

  • Uttrakhand _नहीं रहे पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी_प्रदेश में शोक,,,,

    Uttrakhand _नहीं रहे पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी_प्रदेश में शोक,,,,

    देहरादून—-  उत्तराखंड की राजनीति से आज एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद खंडूड़ी निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत में गहरा दुख व्याप्त है।

    पिछले कई दिनों से उनके आवास पर नेताओं, शुभचिंतकों और परिजनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था। आज उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड ने एक ऐसे सादगीपूर्ण, अनुशासित और ईमानदार जननेता को खो दिया, जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में स्वच्छ छवि और दृढ़ नेतृत्व की मिसाल कायम की।

     

    सेना से राजनीति तक_ अनुशासन और ईमानदारी की पहचान बने खंडूड़ी

    Bhuvan Chandra Khanduri भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए थे। उन्हें देश के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee राजनीति में लेकर आए थे। वर्ष 1990 के दशक में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय राजनीतिक सफर शुरू किया और बहुत कम समय में अपनी साफ-सुथरी छवि, कार्यशैली और संगठन के प्रति समर्पण से शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया।

    पहली बार लोकसभा पहुंचने के महज दो वर्षों के भीतर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया। यह उनके प्रति पार्टी नेतृत्व के भरोसे और राजनीतिक क्षमता का बड़ा प्रमाण माना गया।

    उत्तराखंड की कमान संभालने वाले मजबूत प्रशासक

    साल 2007 में जब उत्तराखंड में भाजपा आंतरिक गुटबाजी और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी, तब पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा भुवन चंद्र खंडूरी पर जताया। तमाम राजनीतिक समीकरणों और दबावों के बावजूद प्रदेश की कमान उनके हाथों में सौंपी गई।

    उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए पारदर्शिता, अनुशासन और विकास को प्राथमिकता दी। सादगीपूर्ण जीवनशैली और कठोर प्रशासनिक फैसलों के कारण वे आम जनता के बीच अलग पहचान रखते थे।

    प्रदेशभर में शोक, श्रद्धांजलियों का दौर शुरू

    पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की सूचना मिलते ही प्रदेशभर से शोक संदेश आने शुरू हो गए हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उत्तराखंड की राजनीति के एक ईमानदार और अनुशासित चेहरे के रूप में याद किया है।

    उनका जाना केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनभावनाओं और स्वच्छ राजनीति की एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

  • दोपहर में बाहर निकलने से बचे,,,, एडवाइजरी जारी,,,, मैदानों में बढ़ेगा हीट का अटैक,,,, अगले 4 दिन भीषण गर्मी..,,,,,,

    दोपहर में बाहर निकलने से बचे,,,, एडवाइजरी जारी,,,, मैदानों में बढ़ेगा हीट का अटैक,,,, अगले 4 दिन भीषण गर्मी..,,,,,,

    देहरादून—-  उत्तराखंड में गर्मी अब और विकराल रूप लेने जा रही है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मैदानी जिलों में तापमान लगातार बढ़ने का अनुमान जताया है।

    हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और देहरादून में पारा 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच सकता है, जबकि नैनीताल समेत कई जिलों में भी गर्म हवाओं का असर साफ दिखेगा। भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने सभी जिलों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है।

    19 मई से गर्मी का प्रकोप तेज, पूरे प्रदेश में मौसम रहेगा शुष्क

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 19 मई को पूरे उत्तराखंड में मौसम शुष्क रहेगा। हरिद्वार में तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचने का अनुमान है, जबकि ऊधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में पारा 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

    टिहरी, अल्मोड़ा, चंपावत और निचले चमोली क्षेत्रों में भी तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    21-22 मई तक नहीं मिलेगी राहत, मैदानों में हीटवेव जैसे हालात

    मौसम विभाग के मुताबिक 20 से 22 मई तक हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भीषण गर्मी जारी रहेगी। देहरादून, नैनीताल और पौड़ी में भी तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिलेगा। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    SEOC की एडवाइजरी_ दोपहर में बाहर निकलने से बचें

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। आम लोगों से अपील की गई है कि दोपहर के समय अनावश्यक रूप से धूप में बाहर न निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

    अस्पतालों को अलर्ट_ हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा

    स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पेयजल और बिजली व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

    बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों के लिए विशेष सतर्कता

    विद्यालयों, निर्माण स्थलों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए विशेष एहतियाती कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • उत्तराखंड:– पहाड़ से मैदान तक बढ़ी तपिश,,,लू का खतरा बढ़ा,,..

    उत्तराखंड:– पहाड़ से मैदान तक बढ़ी तपिश,,,लू का खतरा बढ़ा,,..

    देहरादून—  उत्तराखंड में लगातार शुष्क बने मौसम के कारण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मैदानी इलाकों में तेज धूप और गर्म हवाओं ने दिन के समय लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है, जबकि रात में उमस भरी गर्मी से भी राहत नहीं मिल रही।

    मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना जताते हुए हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है।

    प्रदेशभर में इन दिनों मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। पहाड़ से लेकर मैदान तक सूरज की तीखी किरणें लोगों को झुलसा रही हैं। लगातार बढ़ते तापमान के चलते मैदानी क्षेत्रों में पारा 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। दोपहर के समय चल रही गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

    राजधानी देहरादून और जनपद नैनीताल में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह से ही तेज धूप खिलने के कारण दिन चढ़ने के साथ तापमान में तेजी से इजाफा हुआ। बीते 24 घंटों में तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    पर्वतीय क्षेत्रों में भी चिलचिलाती धूप महसूस की जा रही है, हालांकि सुबह और शाम के समय हल्की हवाओं के चलते मौसम कुछ हद तक राहत भरा बना हुआ है।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है और तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक और वृद्धि हो सकती है।

    विभाग ने हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं लू चलने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय धूप में निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

    गर्मी बढ़ने के साथ देहरादून समेत कई इलाकों में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। कई क्षेत्रों में लोगों को पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान का असर जल स्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है।

    मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जहां दिन का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बदल सकता है।

    कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की संभावना जताई गई है, हालांकि मैदानी क्षेत्रों में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

  • मेडिकल स्टोर हड़ताल– दुकान बंद करी तो हो सकती हैं कानूनी कार्यवाही।

    मेडिकल स्टोर हड़ताल– दुकान बंद करी तो हो सकती हैं कानूनी कार्यवाही।

    दिल्ली/उत्तराखंड—  पूरे देश मे और उत्तराखंड में 20 मई को दवा कारोबारियों की हड़ताल प्रस्तावित हैं, इसको देखते हुए उत्तराखंड के औषधीय नियंत्रक ताजवर सिंह ने सख्त रुख अपनाया हैं और इस पर केमिस्ट एसोसिएशन को पत्र लिख कर दवा की दुकानें ना बंद करने की अपील की हैं।

    उन्होंने ने कहा कि दवा की बिक्री आवश्यक सेवाओ में आती हैं, ऐसे में यदि दवा की दुकानें बंद हुई, और मरीजो को परेशानी का सामना करना पड़ सकता , तो इस पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती हैं,

    ड्रग कंट्रोलर ने कहा कि ड्रग एक्ट के तहत दवा कारोबारी हड़ताल पर नही जा सकते है, इसीलिए दवा कारोबारियों से अपील हैं कि हड़ताल के वावजूद अपनी दुकानें खुली रक्खे, ताकि आम जनमानस को परेशानी का सामना ना करना पड़े, यह व्योवसाय लोगो के जीवन से जुड़ा हुआ है।

    गौरतलब तलब हैं कि देश के दवा कारोबारी ऑनलाइन दवा की विक्री के विरोध में 20 मई को हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। उनका मानना है कि ऑनलाइन दवा विक्री से उनके कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    उत्तरांचल औषधि संध के प्रदेश अध्यक्ष बी एस मनकोटी के अनुसार, यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक नही लगाई तो दवा कारोबारियों के कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा, ऐसी स्थिति में उन्होंने ने कहा कि हालात नही बदले, तो आने वाले समय मे दुकाने बंद करनी पड़ेगी।

  • पद्मश्री अनूप साह और पार्थ शर्मा की मेहनत को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान,,, ‘ग्रीन स्क्रीन’ में चमकेगी ‘दिव्य माँ,,,,,’

    पद्मश्री अनूप साह और पार्थ शर्मा की मेहनत को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान,,, ‘ग्रीन स्क्रीन’ में चमकेगी ‘दिव्य माँ,,,,,’

    उत्तराखंड—  उत्तराखंड के बेहद जहरीले किंग कोबरा सांप पर बनी फिल्म ‘दिव्य माँ’ का जर्मनी के प्रतिष्ठित ‘ग्रीन स्क्रीन’ अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए चयन हुआ है।

    फ़िल्म मेकिंग और वन्यजीव प्रेमियों में इस बात को लेकर खुशी है।

    उत्तराखंड के विशाल और दुर्लभ किंग कोबरा सांप पर आधारित वन्यजीव डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘दिव्य माँ’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। फिल्म का चयन जर्मनी में आयोजित होने वाले विश्वप्रसिद्ध ‘ग्रीन स्क्रीन’ इंटरनेशनल फिल्म फैसस्टिवल के लिए आधिकारिक रूप से किया गया है। महोत्सव सितंबर माह में 9 से 13 तक इसी वर्ष आयोजित होगा।

    फिल्म का निर्माण प्रख्यात वन्यजीव फोटोग्राफर एवं पद्मश्री सम्मानित अनूप साह और वन्यजीव प्रेमी एवं संरक्षणवादी पार्थ शर्मा ने किया है। फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अजय सूरी ने किया है।

    फिल्म की शूटिंग पूरी तरह कुमाऊँ और गढ़वाल के अलग अलग क्षेत्रों में लगभग 18 महीनों तक अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में की गई है। फ़िल्म अपने नाम की तरह ही एक अनूठी और प्रभावशाली है।

    उत्तराखंड के जंगलों में पाए जाने वाले किंग कोबरा की रहस्यमयी और कम जानकारी वाली दुनिया को दर्शाती है तथा इस अद्वितीय सर्प की पारिस्थितिक महत्ता को उजागर करती है।

    फिल्म प्रकृति, पौराणिक मान्यताओं, संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के नाजुक संतुलन के संबंध को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करती है। फिल्म में विशेष रूप से मादा किंग कोबरा के असाधारण नैस्टिंग व्यवहार और एक माँ के रूप में उसके सर्वोच्च त्याग को दर्शाया गया है।

    इसे पशु जगत में काफी दुर्लभ माना जाता है और ये दूसरी सर्प प्रजाति में देखने को नहीं मिलता।

    फिल्म निर्माताओं की विश्वास है कि यह डॉक्यूमेंट्री वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी और प्रकृति के सबसे खतरनाक किंग कोबरा के प्रति सम्मान होगा। टीम यैलो मार्टेन प्रोडक्शन्स ने जर्मनी के आयोजकों का आभार जताया है।

  • उत्तराखंड–  शुरू होने वाला है SIR ,,,, वोट बचाना है तो तैयार रखें ये दस्तावेज..,,,

    उत्तराखंड– शुरू होने वाला है SIR ,,,, वोट बचाना है तो तैयार रखें ये दस्तावेज..,,,

    देहरादून—-   उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट करने के लिए चुनाव आयोग जल्द ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू करने जा रहा है।

    इस अभियान के तहत प्रदेशभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। आयोग का कहना है कि करीब 70 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है और उनके वोट सुरक्षित हैं,

    लेकिन लगभग 9 लाख मतदाताओं का वर्ष 2003 से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अब उनसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएंगे।

    अभियान शुरू होते ही बूथ लेवल अधिकारी (BLO) प्रत्येक मतदाता के घर पहुंचकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे। इस फॉर्म में मतदाता की वर्तमान जानकारी पहले से दर्ज होगी। मतदाता को इसमें वर्ष 2003 के वोट से जुड़ी जानकारी भरनी होगी।

    यदि किसी व्यक्ति का 2003 में वोट नहीं था, तो उसे अपने माता-पिता के वोट से जुड़ी जानकारी देनी होगी। अगर माता-पिता का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है, तो दादा-दादी के वोट संबंधी विवरण मांगे जाएंगे।

    12 दस्तावेजों को माना जाएगा वैध

    चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के पास 2003 का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वे आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों में से कोई भी एक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। इससे उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखा जा सकेगा।

    मान्य दस्तावेजों में शामिल हैं_

    आधार कार्ड

    जन्म प्रमाण पत्र

    पासपोर्ट

    स्थायी निवास प्रमाण पत्र

    OBC/SC/ST जाति प्रमाण पत्र

    वन अधिकार प्रमाण पत्र

    परिवार रजिस्टर

    भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र

    सरकारी या PSU कर्मचारी पहचान पत्र

    पेंशन भुगतान आदेश

    शैक्षिक प्रमाण पत्र

    राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से संबंधित दस्तावेज

    नया फोटो भी करना होगा जमा

    मतदाताओं को गणना प्रपत्र पर अपना नया फोटो चिपकाकर BLO को वापस देना होगा। यदि किसी के पास 2003 से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो उसे इसकी जानकारी फॉर्म में दर्ज करनी होगी। इसके बाद संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाएगा और फिर वह ERO कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा कर सकेगा।

    मृत, विस्थापित और डुप्लीकेट वोटरों पर फोकस

    चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। इसके तहत मृत, विस्थापित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, जबकि वास्तविक और पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।

    प्रदेशभर में शुरू होने जा रहा यह अभियान आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची को मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • उत्तराखंड पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल —  11 अफसरों के हुए तबादले,,,,,

    उत्तराखंड पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल — 11 अफसरों के हुए तबादले,,,,,

    देहरादून—  उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं।

    पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में 11 पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) को विभिन्न जिलों, वाहिनियों और इकाइयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

    जारी सूची के अनुसार, 31वीं पीएसी रुद्रपुर में तैनात तपेश कुमार चंद को पौड़ी गढ़वाल भेजा गया है। वहीं देहरादून में तैनात नीरज सेमवाल का तबादला उधमसिंहनगर किया गया है।

    नैनीताल में तैनात सुमित पांडे को हरिद्वार और पीटीसी नरेंद्रनगर में तैनात अस्मिता ममगाईं को पौड़ी गढ़वाल में नई जिम्मेदारी दी गई है।

    इसके अलावा सीआईडी सेक्टर देहरादून में तैनात ओशिन जोशी को हरिद्वार भेजा गया है, जबकि चंपावत में तैनात विमल प्रसाद अब नैनीताल में सेवाएं देंगे। उधमसिंहनगर में तैनात विमल रावत को 31वीं पीएसी रुद्रपुर भेजा गया है।

    हरिद्वार में तैनात नताशा सिंह को सीआईडी सेक्टर देहरादून, पौड़ी गढ़वाल में तैनात निहारिका सेमवाल को चंपावत तथा पौड़ी में कार्यरत तुषार बोहरा को देहरादून स्थानांतरित किया गया है। वहीं पीटीसी नरेंद्रनगर में तैनात अखलेश कुमार को उधमसिंहनगर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पुलिस मुख्यालय ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाने के लिए यह व्यापक फेरबदल किया गया है।